बेटि ऐह भगवानके बहुत बड्का उपहार !
बेटि बिना मानव जीवन हैइ बेकार!!

माईयो त बेटिये रहे पहिले जेकरा कोईखसे जन्म लक देख्ली ई सन्सार!
बचपनमे माई नैदेत माया,मम्ता,स्नेह त जबानिमे बिगैर ज्याइत संस्कार!!

बहिनो त बेटिये हैइ जेकरा हातसे राखी बाईन मन्बैछि रक्षाबन्धन त्यौहार!
जैइ घरमे बेटि नै रहत त सुनसान लागत उ घरपरिवार!!

केकरो बेटियेसे बिबाह क कहैछी भगेल हमर सपना साकार!
तैयो बेटि जन्म लैय त पिटैछी कपार!!

बच्चा,जबान,बृद्ध तिनु अबस्थामे बेटिये हौय जिबन जियैके अधार!
आदमीके सोच कतेक निच हया जे बेटियेके करैय हत्या, हिंसा आ बलात्कार!!

बेटि जन्म लैय त उ परिबार पर पैर जाईय बड्का भार!
जखन बेटि बिबाहमे दहेज दैत दैत बाप भजाय बहुत लचार!!

बेटि बिना पूरा नै होइय कोनो बिध-ब्यबहार आ पबनी तिहार!
अख्नो देखियौ सन्सारके बहुत देशमे बेटिये चलबैय सरकार !!

बेटि बिना परिबार सम्भब नैहैई करु नै ओकरा दुर्ब्यबहार!
बेटि जन्म लेलक त बुझ्हु भगवान देलक अहाके जिबनके उत्तम उपहार !!

सुरेन्द्र महतो
बर्दिबास-९ पशुपतिनगर (महोत्तरी )
हाल मलेशिया

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